मार्क्सवाद लेनिनवाद एक वैज्ञानिक तरीका है, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक (वैग्यानिक भी) परिस्थितियों का विश्लेषण करने के लिए. यह हथियार है पुराने व्यवस्था को समझने, बदल कर नयी व्यवस्था को लाने के तरीके इजाद करने और नयी व्यवस्था को लाने के लिए.
यह विश्लेषण द्वंद्वात्मक है. इस विश्लेषण में किसी भी घटना या परिस्थिति को गति में, ऐतिहासिक संदर्भ में, पुर्णतया में किया जाता है. जब कि वैश्विक दृष्टिकोण भौतिकवादी है.
यह विधा जड़ नहीं है बल्कि निरंतर प्रगतिशील है और नये खोज और विश्लेषण के साथ, नयी परिस्थिति के अनुसार बढ़ता और धनी होता है.
मार्क्सवाद लेनिनवाद को आगे बढ़ाने में सोवियत यूनियन की कम्यूनिस्ट पार्टी, जिसका सामूहिक नेतृत्व स्टालिन के हाथ में था, और कइ अन्य का भी सक्रिय सहयोग रहा है.
हालांकि कई भटकाव और संशोधन भी हो चुके हैं इस विचारधारा में, गद्दारों और साम्राज्यवादियों के खुलेयाम और छिपे हस्तक्षेप से, कक्षा एक से कालेज तक में बुर्जुआ शिक्षा के कारण, मीडिया पर कुटिल दुष्प्रचार के कारण.
इसके कारण शिक्षित और
मजदूर वर्ग के एक हिस्से में मार्क्सवाद लेनिनवाद के लिए भ्रम है. दुश्मन वर्ग तो अपना काम कर ही रहा है. आधे अधूरे मार्क्सवादी लेनिनवादी नीम हकीम खतरेजान हैं, खास कर फासीवाद के समय में.
अंततः यह क्रांतिकारी विचारधारा है नये युग के निर्माण के लिए. पर यह भी समझना चाहिए कि इसे समझना सामान्य ग्यान का हिस्सा नहीं है, पढ़ना होगा और समय देना होगा. मूल पाठ्य पर मेहनत करना होगा!!