फासीवाद बढ़ रहा है. मिहनतकाश आवाम का शोषण बढ़ रहा है और जुल्म भी बढ़ रहा है.
सही बात है! पर एक बात पर गौर करने की जरुरत है! हम मोदी और उसके संगठन, यानि आरएसएस, भाजपा और अन्य संगठनों का कितना भी भन्डा फोड़ दें, जनता को उसकी पोल खोल कर दिखा दें, वह बढ़ता ही जा रहा है! उसकी सरकार त्रिपुरा में बनी, कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी, बंगाल और दिल्ली में भी बढ़ रहा है, बिहार, गोवा, नागालैंड में हार कर भी सत्ता में है! गुजरात में भले ही कद घटा हो, पंजाब में हारा हो, पर कुल मिलकर उसका मुद्दा, कर्ह्क्रम आगे बढ़ रहा है!
न्यायलय, पुलिस, प्रशाषण, शिक्षा, सीबीआई, आरबीआई, चुनाव आयोग, आदि उसके कब्जे में है. विरोधी दल, वाम तक भी हतप्रभ हैं. हर चाल उल्टा पड़ रहा है! दोस्तों, हम जितना भी ताकत लगा रहे हैं, काम कर रहे हों, लिख रहे हों, सोशल मिडिया पर अपना अलग पहचान बना रहे हों, पर फासीवाद आगे बढ़ है!
फासीवाद क्या है? यह पूंजीवाद ही है, जैसे मोनोपोली पूंजीवाद या क्रोनी पूंजीवाद. पर फासीवाद पूंजीवाद का बेहद ही सड़ांध और हिंसात्मक रूप है. साथ साथ यह एक सामाजिक आन्दोलन भी है, जिसमे समाज का एक हिस्सा, जिसमे लम्पट बेरोजगार, मुर्ख युवा वर्ग, मध्यम वर्गीय कुपमंडूक, असामाजिक तत्व और हिन्दू राष्ट्र के उम्मीद में अंधे बने लोग हैं! यही कारन है की हमारे प्रोपगंडा, हमारा तार्किक और वैज्ञानिक प्रचार असफल हो रहा है! यह भी ध्यान रखने की बात है की फासीवाद अरबों रुपये और मिडिया का उपयोग तथा दुष्प्रचार बड़े ही सलीके से चला रहा है और सत्ता में बना ही नहीं हुआ है बल्कि विपक्षियों को ख़त्म कर रहा है, अपने मालिकों, पूंजीपतियों को भारी मुनाफा दिलवा रहा है, क़ानूनी और गैर क़ानूनी तरीके से, और खुद के लिए भारी दलाली!
तो दोस्तों, फासीवाद को सामान्य तरीके से नहीं हरा सकते, ना ही चुनाव के द्वारा, ना ही प्रचार और बड़े बड़े रैलियों के द्वारा. 2019 के बाद तो वह भी नहीं करने दिया जायेगा “राष्ट्रिय” हित में. और बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, मजदूर वर्ग और किसानों पर अत्याचार बढेगा! जेल अभी ही भरे हुए हैं, उसके पार्क में भी जगह नहीं बचेगा! शायद कब्रगाह में जगह रहे!! और इनका लक्ष्य एक ही है, मुनाफा और ज्यादा मुनाफा! तो सोचने की जरुरत है की क्या करें? क्रन्तिकारी पार्टी! वैसे कभी सोचा है कि कोई ऐसी क्रन्तिकारी पार्टी है जो पुरे तौर पर पुलिस और इंटेलिजेंस को पता हो? बिना अंडर ग्राउंड कैडर के? बिना पार्टी के सदस्यों को प्रशिक्षण देने के, ताकि वह भी नेता बने और पार्टी को आगे चला सकें? कभी सोचा है कि क्यूँ एक क्रन्तिकारी पार्टी के सदस्य निकल कर भाजपा या कौंग्रेस में जा रहे हैं, क्यूँ सत्ता से हटने के बाद पार्टी के सदस्य त्राहिमाम कर रहे हैं, राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक से सुरक्षा की भीख मांग रहे हैं? क्रांतिकरी पार्टी, क्रन्तिकारी विचारधारा के साथ. चुनाव जितने के लिए नहीं, बल्कि पूंजीवादी प्रजातंत्र के पोल खोलने के लिए और उसे ध्वस्त करने के लिए!
मजदूर वर्ग, किसान फिर से उठ रहा है, हर रोज संघर्ष में शामिल है, रोजगार के लिए और अपने गिरते हुए मजदूरी और जीवन को संभालने के लिए! जरुरत है फिर से क्रन्तिकारी रास्ते की तरफ चलने की, विद्रोह का झंडा बुलंद करने के लिए! जिसे क्रांति की जरुरत है वह समझता है कि कौन धूर्त है और पूंजी की दलाली कर रहा है और कौन सी पार्टी उसके मुक्ति के लिए काम कर रहा है!
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