Friday, 25 March 2016

भगतसिंह: साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज

छी न्यूज़, धिक् टीवी और थू टीवी के बारे में भगतसिंह के विचार:
''दूसरे सज्जन जो साम्प्रदायिक दंगों को भड़काने में विशेष हिस्सा लेते रहे हैं, वे अख़बारवाले हैं। पत...्रकारिता का व्यवसाय, जो किसी समय बहुत ऊँचा समझा जाता था, आज बहुत ही गन्दा हो गया है। ये लोग एक-दूसरे के विरुद्ध बड़े मोटे-मोटे शीर्षक देकर लोगों की भावनाएँ भड़काते हैं और परस्पर सिर-फुटौव्वल करवाते हैं। एक-दो जगह ही नहीं, कितनी ही जगहों पर इसलिए दंगे हुए हैं कि स्थानीय अख़बारों ने बड़े उत्तेजनापूर्ण लेख लिखे हैं। ऐसे पत्रकार, जिनका दिल व दिमाग़ ऐसे दिनों में भी शान्त रहा हो, बहुत कम हैं।'' — भगतसिंह ('साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज', जून, 1928 के ‘किरती’ में प्रकाशित)
#Socialism 

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