Thursday, 31 March 2016

राजनीति और राजनैतिक दलाली मे फ़र्क

Padam Kumar
राजनीति (politics) और राजनैतिक दलाली (political agency) मे फ़र्क है
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अक्सर जिसे राजनीति समझा जाता है उसे political agency कहते हैं .... जैसे हमारे मोदी साहब अंबानी और अडानी के political agent हैं ...
असल मे इतिहास और अर्थतंत्र की समझ का विकास होते ही राजनीति स्वतः ही शुरु हो जाती है। ...
राजनीति प्रतिनिधित्व का संघर्ष मात्र है... कोई करियर नहीं ....
करियर दलाली मे हो सकता है।

ये सिर्फ मध्यम वर्गीय भ्रम होता है, जो political agency और politics मे अंतर नहीं कर पाते...
और political agency को राजनीति मान बैठते हैं ...
Political agent एक विधायक या सांसद होता है... वो राजनीतिज्ञ भी हो ये ज़रूरी नहीं।
राजनीति मे कुर्बानी भी देनी पड़ती है...
भगत सिंह राजनीतिज्ञ थे.... और वो कत्ल कर दिए गये...
वर्ग संघर्ष ही राजनीति है।
जबतक जनता का शासन नहीं आता तबतक जनता के लिए संघर्ष करने वालों (जनता के राजनेता) को आतंकी साबित करके या सीधे-सीधे मार देने की कोशिश बरकरार रहती है।
और ये काम शोषक वर्ग के असल राजनेता अपने agent के माध्यम से करते हैं।
शोषक वर्ग के नेता अंबानी, टाटा, अडानी, बिरला जैसे राजघराने हैं। जो कभी खुद को राजनेता नही कहलवाते।

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