Monday, 10 October 2016

देश का नाम ही अपने नाम पर सऊदी अरब रखा

Mukesh Tyagi
1920 तक इब्न सऊद अरब मरुस्थल का एक छोटा कबीलाई सरदार था, जो बिकने के लिए तैयार था, ईमान जैसी चीज जिसके पास भी न फटकती थी। ब्रिटिश सरकार ने उसको पैसा और हथियार दिए, साथ में TE Lawrence के नेतृत्व में फौजी टुकड़ी; 1922 तक उसे साठ हजार पाउंड सालाना मिलते थे, जिसे चर्चिल ने बढाकर १ लाख पाउंड कराया। चर्चिल ने उसे एक रोल्स रॉयस गाड़ी भी भेंट में दी। चर्चिल की नजर में वह 'असहिष्णु और खून का प्यासा' लेकिन ब्रिटिश वफादार था!। इस मदद से उसने जिस इलाके पर कब्ज़ा किया उस देश का नाम ही अपने  नाम पर सऊदी अरब रखा और वहाँ के पेट्रोलियम उद्योग को ब्रिटिश-अमेरिकी कंपनियों को सौंप दिया। ब्रिटिश और अमेरिकी साम्राज्यवाद का यह भाड़े का टट्टू आज इस्लाम का सरपरस्त है, जबकि ज्यादातर islamist अमेरिका का गालियाँ देते मिलते हैं!
अब अगर ऐसा खानदान यमन में जनाजे पर बम बरसा कर 150 को मार दे, ISIS जैसी तंजीमों की मदद करे, उत्तर अफ्रीका से लेकर पश्चिम-दक्षिण एशिया तक आतंकवादियों की मदद करे तो उसमें अचम्भा क्या? जिसकी पैदाइश ही इस सड़ांध में से हुई हो, जिसकी नजर में वह अपने और अपने आकाओं के स्वार्थों के लिए किस काम को गिरा हुआ समझे?
अचम्भा इस पर भी मत करिये कि ऐसे ही शुरुआत वाले भारत के नए शासक भी आजकल उसी अमेरिकी-ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के दरबार में हाजिरी लगाने में गर्व महसूस करते हैं, साथ में इनके बड़े सलाहकार अजित डोवाल का बेटा, शौर्य डोवाल, जो संघ के बड़े नेता राममाधव के साथ मिलकर इंडिया फाउंडेशन चलाता है, जिसके कार्यक्रमों में खुद मोदी जी और उनके मंत्री लोग इकट्ठा होते हैं, वह साथ में एक कंपनी ZeusCorp का भी पार्टनर है। इस कंपनी के मालिक का नाम है His Highness Prince Mishaal bin Abdullah bin Turki bin Abdulaziz Al-Saud - उसी अल सऊद खानदान के वारिसों में से एक, शायद इब्न सऊद का पोता!
थोड़ा ढूंढिये तो पाएंगे कि दुनिया भर के इन सब गिरोहों के तार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं - इस्लामी, हिंदुत्ववादी, ईसाईयत वाले, यहूदी जियनवादी - और इन सबके ऊपर वरदहस्त मिलेगा, बड़े साम्राज्यवादी गिरोहों, वित्तीय-औद्योगिक कारोबारियों, हथियार व्यापारियों, मीडिया घरानों, आदि का। ऐसे ही गिरोह विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों के पीछे मिलेंगे और यही सारे तनाव-युद्दोन्माद के माहौल के पीछे, मुनाफा कमाते हुए! बाकी सब राष्ट्रवाद, मजहब परस्ती, आदि सिर्फ जनता को मूर्ख बनाकर लूटते रहने का कारोबार है।
(टिप्पड़ी: समाजवाद ही एकमात्र रास्ता है, जहाँ मनुष्य एक मनुष्य की तरह रहा सकता है! जहाँ शोषण नहीं हो, एक मनुष्य दुसरे मनुष्य को मजदुर नहीं बना सकता है! बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, युद्ध, अन्धविश्वास नहीं हो! आधार क्या होगा इस समाजवाद का? समाज का धन समाज का होगा. व्यक्तिगत पूंजी का खात्मा होगा. उत्पादन समाज के खपत के लिए होगा जरुरत के मुताबिक न की मुनाफे के लिए)

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