मानसिक बीमारी पूंजीवाद का उत्पाद है, जो युवाओं, मजदूरों, किसानों को रोजगार, वैज्ञानिक शिक्षा, योग्य आवास और स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम रखता है. नौकरियों को खोने, अपमानित होने का लगातार डर रहता है! अगला भोजन मिले या न मिले की चिंता है. बुर्जुआ मिडिया का भी रोल है. आत्म हत्या भी इसी बीमारी का अग्रिम रूप है और किसी भी पूंजीवादी देश, भले ही कितना भी "उन्नत" हो, में बहुतायत में दिखता है.
आतंकवाद और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में लोग मानसिक तनाव और बीमारी से अधिक ग्रसित होते हैं। धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय, रंग और लिंग भेद और उत्पीडन इस बीमारी को बढ़ाता है.
इन बीमारों में से कुछ, जो बुर्जुआ संस्थानों, विद्यालयों के उत्पाद हैं, पूंजीवाद का समर्थन करते हैं!
पूंजीवाद का समर्थन करने वाले ये मानसिक दास बुर्जुआ पार्टियों, दक्षिण पंथी विचारधाराओं, धार्मिक और सांस्कृतिक ठगों, पूंजीपती जो उन्हें नौकरियां प्रदान करते हैं, आदि का समर्थन करते हैं, लेकिन समाजवाद का विरोध करते हैं।
पूंजीवाद आज के हर बीमारी, शोषण, प्रतारणा, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, अपराध को जन्म देता है! यह बीमारी आज व्यापक है समाज में, जिसमे से अधिकांश को पता ही नहीं होता, क्यूँ की अब वह सामान्य सा दिखने लगा है!
पूंजीवाद आज के हर बीमारी, शोषण, प्रतारणा, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, अपराध को जन्म देता है! यह बीमारी आज व्यापक है समाज में, जिसमे से अधिकांश को पता ही नहीं होता, क्यूँ की अब वह सामान्य सा दिखने लगा है!
इनका इलाज केवल और केवल समाजवादी क्रांति है!
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